सूरह अल-फ़लक़ (प्रातःकाल)
سورة الفلق
सूरह #1135 आयतेंमक्कीपारा 30
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अनुवाद:
रुकू 1 (رُكُوْعُهَا ١)
(113) सूरह अल-फ़लक़ (प्रातःकाल) (मक्की सूरह)
आयत 5 (آيَاتُهَا ٥)
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
قُلۡ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلۡفَلَقِ ١مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ٢وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ٣وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَٰتِ فِي ٱلۡعُقَدِ ٤وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ٥
📖 Page 1 Verse-by-Verse Translations
Ayah 1
Say, "I seek refuge in the Lord of daybreak
Ayah 2
From the evil of that which He created
Ayah 3
And from the evil of darkness when it settles
Ayah 4
And from the evil of the blowers in knots
Ayah 5
And from the evil of an envier when he envies
सूरह अल-फ़लक़ (प्रातःकाल) के बारे में
सूरह अल-फ़लक़ मुअव्विज़तैन की पहली सूरह है। इसमें सुबह के रब की पनाह में मख़लूक़ के शर, रात की तारिकी, जादू-टोने और हसद करने वालों के शर से हिफ़ाज़त की दुआ है।
📜📜 अवतरण इतिहास व काल
श्रेणी: मक्की सूरह
प्रमुख विषय व पाठ
- सुबह के रब अल्लाह की पनाह मांगना
- मख़लूक़ के शर और रात की तारिकी की बुराइयों से हिफ़ाज़त
- जादू-टोने और हसद करने वालों की बुरी नज़र से बचाव
तिलावत के मुख्य अवसर
हर नमाज़ के बाद, सोने से पहले और जादू, नज़र ओ हसद से हिफ़ाज़त के लिए सूरह अन-नास के साथ पढ़ी जाती है।
👑👑 आला हज़रत व अहले सुन्नत विद्वत संदर्भ
- Kanzul Iman — Translation by Aala Hazrat Imam Ahmad Raza Khan (رحمۃ اللہ علیہ)
- Fatawa Razvia — Vol. 26 (Tafseer & Recitation Virtues)
- Bahar-e-Shariat (Sadr al-Shariah)
प्रमाणिक हदीस व शास्त्रीय स्रोत
Sahih Muslim 814Sunan Abi Dawud 1523